10 अप्रैल 2008 को नेपाल के मतदाता संविधान सभा के चुनाव के लिए भोर से कतार में खड़े हुए। रॉयटर्स ने इस मतदान को 2006 के उस शांति समझौते का केंद्र बताया जिसने दस साल का संघर्ष समाप्त किया और माओवादी गुरिल्लाओं को वैध दलगत राजनीति में लाया।

इस कतार की खास बात यह थी कि मतदाता केवल प्रतिनिधि नहीं चुन रहे थे। वे युद्ध के पुराने पक्षों को एक ही चुनावी प्रक्रिया के भीतर ला रहे थे। नई संविधान-रचना करने वाली सभा को वोट देते हुए लोग सशस्त्र संघर्ष और राजनीतिक प्रक्रिया की सीमा पर खड़े थे।